नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जन्म जयन्ती 23 जनवरी
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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जन्म जयन्ती 23 जनवरी

दिन, महीने, साल शताब्दी अपनी गति से आते-जाते रहते हैं, तारीखे बदलती रहती है लेकिन कुछ तारीखे इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो जाती है। इन मामूली सी तारीखों पर इतिहास में ऐसे घटनाक्रम हुए जिन्होंने आने वाले समय में पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी। तारीखो और उनके घटनाक्रमों के बारे में जानकार ही हम काफी कुछ सीख सकते हैं। इसी कड़ी में हम शुरु कर रहे हैं, एक खास सीरीज, इतिहासनामा।

आज की तारीख है 23 जनवरी और आज का दिन खास बनता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म जयंती से । नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ। भारत में इस समय नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम काफी चर्चा में बना हुआ है। इस साल देश उनकी 125 वी जन्म जयंती मना रहा है। भारत सरकार ने हाल ही में नेता जी की मूर्ति इंडिया गेट पर स्थापित करने की घोषणा की है। साथ ही गणतंत्र दिवस समारोह जो कि पहले हर साल 25 जनवरी से शुरू होता था, उसे अब नेताजी की जयंती 23 जनवरी से 26 जनवरी तक मनाया जायेगा।

सुभाष चंद्र बोस ने अपनी शुरुआती शिक्षा कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल से पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए 1913 में कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। यहां से साल 1915 में उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। उनके माता पिता चाहते थे कि सुभाष चंद्र बोस भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाएं। सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए उन्हें इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय भेजा गया था।

नेताजी ने आईसीएस की परीक्षा दी और उस में चौथा स्थान हासिल किया, लेकिन देश के लोगों की दयनीय हालात देखकर उनमें देश सेवा की भावना जागी और वे अपने देश भारत वापस आ गए। देश की आजादी के लिए सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार की स्थापना की और आजाद हिंद फौज का गठन किया। साथ ही उन्होंने आजाद हिंद बैंक की भी स्थापना की।

दुनिया के दस देशों ने उनकी सरकार, फौज और बैंक को अपना समर्थन दिया था। इन दस देशों में बर्मा, क्रोसिया, जर्मनी, नानकिंग (वर्तमान चीन), इटली, थाईलैंड, मंचूको, फिलीपींस और आयरलैंड का नाम शामिल हैं। इन देशों ने आजाद हिंद बैंक की करेंसी को भी मान्यता दी थी। फौज के गठन के बाद नेताजी सबसे पहले बर्मा पहुंचे, जो अब म्यांमार हो चुका है। यहां पर उन्होंने नारा दिया था, ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।

देश की आजादी के लिए उन्होंने युवाओं से क्रांति की अपील की। उनमें गुलामी को सहने की बजाय उससे मजबूती से लड़ने और आगे बढ़ते रहने का आह्वान किया। गांधीजी और नेताजी की कार्यशैली,उनकी विचारधारा भले अलग थी लेकिन देश को आजाद कराने का जज्बा दोनों में एक सा था।

हम आज़ादी की और अग्रसर थे लेकिन अचानक 18 अगस्त 1945 को सुभाष चंद्र बोस का निधन हो गया। कहा जाता है कि सुभाष चंद्र बोस का हवाई जहाज मंचुरिया जा रहा था, जो रास्ते में लापता हो गया। इसके बाद से उनकी मृत्यु की गुत्थी अनसुलझी है। लोगों का मानना है कि वह दुर्घटना के कई सालों बाद 1985 तक जीवित रहे, फैज़ाबाद में अपनी पहचान छुपा कर रहे ।

इतने बड़े जननायक की मौत व पर अभी भी सवाल मंडरा रहे हैं। जब सरकार उनकी जयंती को इतने आदर और सम्मान से मना रही है, उनकी मूर्ति स्थापित कर रही है तो फिर उनकी मौत की गुत्थी पर एक जांच कमेटी बैठाना और उस सवाल को सुलझाना क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं?

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