How does the salary of central employees increase after 7th Pay Commission?
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7th Pay Commission के बाद कैसे बढ़ती है केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी?

केंद्र सरकार यानि के Central Government की ओर से देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को इस हफ्ते बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. पिछले 18 महीनों से लटके हुए डीए एरियर (da arrears) पर इस हफ्ते फैसला लिया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय कर्मचारियों Government employees के डीए बकाया पर अगली बैठक में फैसला लिया जा सकता है। अगर इस बार बैठक में केंद्र सरकार अटके हुए डीए पर फैसला देती है तो उससे कर्मचारियों की न सिर्फ सैलरी में इजाफा होगा बल्कि खाते में करीब एक साथ 2 लाख रुपये तक की राशि क्रेडिट हो सकती है। नेशनल काउंसिल ऑफ ज्‍वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी JCM के सचिव स्टाफ साइड शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, सरकार अटके हुए डीए के पैसे का वन टाइम सेटलमेंट कर सकती है।

नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम के शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, अगर लेवल 1 के कर्मचारियों की बात करें तो डीए पर एरियर करीब 11880 रुपये से लेकर 37554 रुपये के बीच में बनता है. वही अगर हम लेवल 13 के कर्मचारियों की बात करें तो उनका बेसिक पे 1,23,100 रुपये से लेकर 2,15,900 रुपये के बीच में बनता है. इसके अलावा अगर हम लेवल-14 (पे-स्केल) के लिए कैलकुलेशन की जाएगी तो एक कर्मचारी के हाथ में DA एरियर का 1,44,200 रुपये से 2,18,200 रुपये का भुगतान किया जाएगा।

केंद्र सरकार और कर्मचारियों के बीच लटके हुए डीए को बहाल करने की मांग काफी समय की जा रही है. हालांकि अभी तक कोई फैसला नहीं लिया जा सका है. माना जा रहा है अगले कुछ दिनों में कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ इस मसले पर बात हो सकती है।

यह काम इतना आसान नही की सरकार ने फैसला सुनाया और झट से कर्मचारियों के बैंक में पैसे, जी नही। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग सैलरी में इजाफा लेकर आता है। यह अलग बात है कि सरकार के दावे और कर्मचारियों की गुणा भाग में अंतर हमेशा से रहा है, आगे भी रहेगा. कर्मचारियों की मांग को सरकारें कभी भी पूरा नहीं कर पाईं है. आयोग बैठता है और वर्तमान समय के हिसाब से बदलावों की संस्तुति करता है. यह एक लंबी प्रक्रिया होती है जिसमें तमाम कर्मचारी संगठनों से लेकर कानूनी पहलुओं और देश के आर्थिक हालात तथा सरकार के खर्च वहन करने की क्षमता का आकलन करने के बाद रिपोर्ट तैयार होती है. इस रिपोर्ट के कई पहलुओं पर हमेशा विवाद रहा है. कर्मचारी चर्चाओं के बाद भी रिपोर्ट के प्रावधानों और संस्तुतियों से सहमत नहीं होते. वह अपनी मांग उठाने के लिए स्वतंत्र होते हैं और उठाते रहे हैं. रिपोर्ट सरकार के पास जाती है. सरकार वहां पर मंथन करती है और रिपोर्ट को को पूरा का पूरा स्वीकारती है या फिर जरूरी संशोधनों के साथ स्वीकार लेती है. फिर इसे लागू किया जाता है।

अब यह सब अगर पेचीदा लग रहा है समझने में तो, पहले समझिए पे-मैट्रिक्स क्या है और इससे कर्मचारियों की सैलरी पर क्या असर पड़ने वाला है. इससे सरकारी कर्मचारियों को किस तरह फायदा होगा. सातवें वेतन के तहत पे-मैट्रिक्स लेवल 3 से बेसिक पे-स्ट्रक्चर तय होता है. फिलहाल, level-3 में बेसिक पे स्ट्रक्चर न्यूनतम 21,700 रुपए है और अधिकतम या 40 इंक्रीमेंट के साथ 69,100 रुपए होता है.

क्या है पे मैट्रिक्स?

सातवें वेतन आयोग (7th pay Commission) लागू होने के बाद अब केंद्रीय कर्मचारी का स्टेट्स ग्रेड पे से नहीं बल्कि पे मैट्रिक्स (Pay Matrix) से तय किया जाता है. कर्मचारी अब आसानी से अपने वेतन के स्तर का पता लगा सकते हैं, साथ ही भविष्य के वेतन में संभावित बढ़ोतरी के बारे मे भी जान सकते हैं. इससे आपको अपने करियर के शुरुआत में ही यह पता चल जाएगा कि आगे कर्मचारी को कितना फायदा होने वाला है। इसकी गणना के लिए एक टेबल के होती है जिसके जरिए सैलरी की गणना की जाती है. सिविलियन कर्मचारियों, रक्षा बलों और मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) के लिए अलग-अलग पे मैट्रिक्स तैयार किया गया है, जिसके आधार पर उनकी सैलरी बनती है. सिफारिशों के अनुसार, इस स्ट्रक्चर को ऐसे तैयार किया गया है, जिसमें हर कर्मचारी को फायदा मिलता है. सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की सिफारिशों के अनुसार, अब एंट्री लेवल के सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी (Central government employees minimum salary) 7,000 रुपए से बढ़कर 18,000 रुपए हो चुकी है. मतलब अब सैलरी की गणना बेसिक स्ट्रक्चर (Basic pay structure) 18,000 के आधार पर की जाएगी. वहीं, क्लास-वन ऑफिसर को अब मिनिमम 56,100 रुपए सैलरी है. कुल मिलाकर इससे सरकारी कर्मचारियों को सैलरी और उनके भत्ते की गणना का फायदा मिलता है.

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