Economic survey will be presented in Parliament today, what is economic survey? Why is it offered?
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आज संसद में इकोनॉमिक सर्वे पेश होगा, क्या होता है इकोनॉमिक सर्वे? क्यूँ पेश किया जाता है?

देश का आम बजट पेश होने के ठीक पहले आर्थिक सर्वे रिपोर्ट यानि इकोनॉमिक सर्वे संसद के पटल पर रखा जाता है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) बजट 2022 पेश करने से पहले इकोनॉमिक सर्वे पेश करेंगी. लेकिन लोगों के दिमाग में यह सवाल उठता है कि आखिर यह इकोनॉमिक सर्वे होता क्या है और इसे बजट से पहले ही पेश क्यों किया जाता है? तो आइए समझते हैं।

इकोनॉमिक सर्वे किसी लेखा-जोखा की तरह होता है। आसान भाषा में समझिए, उदहारण के लिए किसी मध्य वर्गीय भारतीय परिवार को ले लिया जाए. आम तौर मध्यम वर्गीय परिवार अपने घर के एक-एक सामान का हिसाब एक रजिस्टर में रखता है. साल के अंत में परिवार का मुखिया यह देखता है कि कितना खर्च हुआ और कितनी बचत हुई. उसी के आधार पर वह अगले साल के घर खर्च की तैयारी करता है. इकोनॉमिक सर्वे भी कुछ इसी तरह का होता है. जिसमें देश के पिछले एक साल के हिसाब-किताब के आधार पर अगले साल का बजट तैयार करने की रूपरेखा तय की जाती है।

जी हाँ। इसका मकसद यह होता है की आखिर किन मोर्चों पर फायदा मिला और कहां नुकसान हुआ. इसी इकोनॉमिक सर्वे के आधार पर यह तय किया जाता है कि आने वाले साल में देश की अर्थव्यवस्था के अंदर किस तरह की संभावनाएं मौजूद हैं. इकोनॉमिक सर्वे के आधार पर सरकार को सुझाव भी दिए जाते हैं, लेकिन इन्हें लागू करना है या नहीं करना, यह सरकार की जिम्मेदारी होती है. यही वजह है कि इकोनॉमिक सर्वे को बजट पेश होने के ठीक पहले संसद के पटल पर रखा जाता है। इकोनॉमिक सर्वे न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था का पूर्वानुमान लगाता है बल्कि साथ ही यह भी अंदाजा लगाया जाता है कि पिछले साल के आधार पर क्या महंगा होगा? और क्या सस्ता हो सकता है? इससे यह अंदाजा लगाया जाता है कि आने वाले साल में अर्थव्यवस्था में मंदी रहेगी या तेजी, फिर इसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया होती है।

बजट सत्र से ठीक पहले सरकार ने शुक्रवार यानी 28 जनवरी को डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन (Dr V. Anantha Nageswaran) को चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर नियुक्त किया गया. वित्त मंत्री के संसद में आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट पेश करने के बाद डॉ. नागेश्वरन इकोनॉमिक सर्वे पर 31 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में इकोनॉमिक सर्वे पेश करने के बाद CEA की प्रेस वार्ता होगी।

अगले वित्त वर्ष के लिए वृद्धि का अनुमान लगभग नौ फीसदी रखा जाएगा। जनवरी, 2021 में पेश पिछली आर्थिक समीक्षा में 2021-22 के लिए 11 फीसदी आर्थिक वृद्धि रहने का अनुमान जताया गया था। हालांकि, भारत के सांख्यिकीय मंत्रालय का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि केवल 9.2 फीसदी ही रहेगी।पिछली आर्थिक समीक्षा में अनुमान लगाया गया था कि अर्थव्यवस्था का संकुचन 6-6.5 फीसदी रह सकता है, लेकिन यह अनुमान कोविड महामारी का प्रकोप शुरू होने के महीनों पहले का था, अंतत: 2020-21 में अर्थव्यवस्था का संकुचन 7.3 फीसदी रहा। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मार्च, 2020 के बाद देश में सख्त लॉकडाउन लगाने के कारण आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। 

आज दोपहर 3:45 पर जारी होगा इकोनाॅमिक सर्वे, PIB India पर आप इसे देख सकते हैं।

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