Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

डिजिटल करेंसी आम लोगों के लिए कैसे फायदेमंद होगी?

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022 में डिजिटल रुपया लॉन्च करने की घोषणा की है। जिसके बाद से लोगों में यह उत्सुकता बढ़ती हुई नज़र आ रही है, की आखिर इसका मतलब क्या है? और कैसे आम जन इसका उपयोग कर पाएंगे। आपको बता दें की यह सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी, यानी CBDC होगी। RBI इस डिजिटल करेंसी को नए वित्त वर्ष की शुरुआत में लॉन्च करेगा। डिजिटल रुपया, या CBDC को डिजिटल इकोनॉमी के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही भारत इस तरह से आधिकारिक तरीके से अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च करने वाला पहला बड़ा देश बन जाएगा।

तो चलिए बात करते हैं आपके फायदे की, कि CBDC क्या है? सरकार को इसकी जरूरत क्यों पड़ी? आम लोगों के लिए यह कितना सुरक्षित और फायदेमंद होगा? तो CBDC यानि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी। CBDC एक ऐसी करेंसी है जिसे न हम छू सकते हैं और नाही देख सकते हैं। ये बिल्कुल आम मुद्रा की ही तरह होगा लेकिन बात सिर्फ इतनी है की यह डिजिटल फॉर्मैट में होगा। इस डिजिटल करेंसी के जरिए आप लेन देन कर सकते हैं, किसी भी प्रकार का बिल जमा कर सकते हैं। अब आपके दिमाग में यह सवाल जरूर मंडराएगा की आखिर इसे कहाँ रखा जाएगा? तो इस डिजिटल करेंसी को ऑनलाइन वॉलेट में ही रखा जा सकता। देश में लेन देन के लिए CBDC को कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त होगी।

अब दूसरा सवाल, की आखिर डिजिटल करेंसी CBDC को लॉन्च कौन करेगा? तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, यानी RBI नए फाइनेंशियल ईयर में CBDC को लॉन्च करेगा। नई करेंसी ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित होगी। RBI की ओर से डिजिटल फॉर्म में जारी CBDC एक लीगल टेंडर होगा। सेंट्रल बैंक से जारी करेंसी की तरह ही CBDC भी होगा, लेकिन इसे नोट की तरह आप अपने जेब में नहीं रख सकेंगे। यह करेंसी की तरह ही काम करेगा। साथ ही CBDC को नोट के साथ बदला भी जा सकेगा। यह इलेक्ट्रॉनिक रूप में आपके अकाउंट में दिखाई देगी। RBI की रिपोर्ट में पहले बताया गया था कि CBDC से आप कैश के मुकाबले आसानी से और सुरक्षित तरीके से कहीं पर भी खरीदारी कर सकेंगे।

तीसरा सवाल क्या यह क्रिप्टोकरेंसी जैसी होगी? जी नही, CBDC क्रिप्टोकरेंसी नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक का CBDC एक लीगल टेंडर होगा। इसे RBI जारी करेगा, इसलिए इसमें जोखिम नहीं होगा। इससे देश में आसानी से खरीदारी हो सकेगी। ये प्राइवेट वर्चुअल करेंसी बिटकॉइन से एकदम अलग होगी। प्राइवेट वर्चुअल करेंसी के साथ कई तरह की बाधाएं होती हैं और बिटकॉइन जैसी इन करेंसीज को सभी देशों में मान्यता नहीं मिली है। साथ ही प्राइवेट वर्चुअल करेंसी के किसी सरकार से नहीं जुड़े होने की वजह से इसमें जोखिम बहुत ज्यादा होता है। प्राइवेट वर्चुअल करेंसी कमोडिटी नहीं हैं। साथ ही इनका कोई आंतरिक मूल्य भी नहीं होता है।

प्रश्न नंबर चार, क्या बिटकॉइन की ही तरह यह भी जोखिम भरी करेंसी होगी? नही, इन्वेस्टोपीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य आम लोगों को एक लीगल और सुविधाजनक डिजिटल करेंसी मुहैया कराना है, ताकि उन्हें सुरक्षा संबंधी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़े। सरकार की बजट में डिजिटल करेंसी की घोषणा बिटकॉइन और ईथर जैसी अन्य क्रिप्टो और वर्चुअल करेंसी को लेकर मंशा को व्यक्त करती है। RBI कई मौकों पर बिटकॉइन को लेकर चिंता जता चुका है, क्योंकि बिटकॉइन, ईथर जैसी क्रिप्टोकरेंसी के साथ मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग, टैक्स चोरी जैसा खतरा बना रहता है। ऐसे में इसका इस्तेमाल आतंकवादी संगठन भी कर सकते हैं। इसलिए RBI ने अपनी खुद की डिजिटल करेंसी CBDC लाने की योजना की घोषणा की है।

प्रश्न पाँच,  क्या अमेरिका, चीन और UK की अपनी डिजिटल करेंसी है? CBDC किसी भी देश की आधिकारिक करेंसी का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या डिजिटल टोकन होगा। यह पैसों के लेनदेन, आवश्यक सामानों की खरीदारी के पेमेंट्स में भी काम आएगा।दिसंबर 2021 तक 87 देश (जिनकी वैश्विक GDP में 90% से अधिक की हिस्सेदारी है) CBDC के बारे में रिसर्च कर जानकारी जुटा रहे थे। इनमें से 35 देश मई 2020 में CBDC लाने के प्रोजेक्ट पर विचार कर रहे थे।इनमें से 9 देश पहले ही CBDC को पूरे तरीके से लॉन्च कर चुके हैं। इनमें बहामास, 7 इस्टर्न कैरिबियन और नाइजीरिया शामिल हैं। कैरिबियन देशों से बाहर नाइजीरिया ने भी हाल में अपनी CBDC ई-नायरा लॉन्च की है। हालांकि, 4 सबसे बड़े केंद्रीय बैंकों (अमेरिका, यूरोप, जापान और UK) वाले प्रमुख देश अपनी CBDC लॉन्च करने में सबसे पीछे हैं।चीन और दक्षिण कोरिया सहित 14 देश ऐसे हैं जो अब अपने CBDC के साथ प्रायोगिक चरण में हैं और जल्द ही इसे लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

आखरी प्रश्न, क्या ये डिजिटल करेंसी हम जैसे आम लोगों के लिए फायदेमंद होगी? डिजिटल करेंसी आने से सरकार के साथ आम लोगों और बिजनेस के लिए लेनदेन की लागत कम हो जाएगी। जैसे UAE में एक वर्कर को सैलरी का 50% हिस्सा डिजिटल मनी के रूप में मिलता है। इससे ये लोग अन्य देशों में मौजूद अपने रिश्तेदारों को आसानी से और बिना ज्यादा शुल्क दिए पैसे भेज सकते हैं।वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि अभी इस तरह दूसरे देशों में पैसे भेजने पर 7% से अधिक का शुल्क चुकाना पड़ता है, जबकि डिजिटल करेंसी के आने से इसमें 2% तक की कमी आएगी। इससे लो इनकम वाले देशों को हर साल 16 अरब डॉलर (1.2 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा पैसे मिलेंगे।

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

साझा करें

ताजा खबरें

सब्सक्राइब कर, हमे बेहतर पत्रकारिता करने में सहयोग करें