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World Cancer Day: जानिए कैंसर को लेकर क्या सच और क्या अफवाएँ

आज के समय में पूरा विश्‍व कोविड से डरा हुआ है। पिछले दो साल से हर कोई इस खतरनाक वायरस से जूझ रहा है। बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरण के कारण आए दिन, तरह-तरह की नई बीमारियां लोगों को अपना शिकार बना रही हैं, जिसके कारण वैज्ञानिकों में काफी डर बना हुआ है। इन्हीं खतरनाक बीमारियों में से एक बीमारी है कैंसर।

इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष विश्व भर में 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाया जाता है। वर्ष 1933 में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई थी। इस दिन दुनिया भर में कैंसर (Cancer) के प्रति जागरुकता फैलाने और इसके संकेतों को लोगों तक पहुंचाने के लिए कई तरह के कार्यक्रम रखे जाते हैं, ताकि लोग सही समय पर इसकी पहचान कर सकें। 

विश्व कैंसर दिवस की थीम या विषय हर साल अलग-अलग तय किया जाता है. साल 2022 के लिए विश्व कैंसर दिवस की थीम क्लोज द गैप (Close the Gap) है. इस थीम के साथ इसे पूरे विश्व में मनाया जाएगा.

कैंसर एक बीमारी है, जो कई रोगों का समूह है. इसमें असाधारण रूप से कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं और ये ट्यूमर का रूप ले लेती हैं. ये बढ़ी हुई चर्बी की गांठ होती हैं. कैंसर शरीर के किसी भी अंग में मौजूद कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है. इसमें प्रभावित कोशिकाएं शरीर में फैलने लगती हैं, जिससे ट्यूमर बढ़ने लगता है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है। मुख्य रूप से कैंसर के कारण आनुवांशिक रूप से होने वाले असाधारण परिवर्तन, शराब, धूम्रपान, तनाव, कम फाइबर वाला खाना और केमिकल रेडिएशन को माना जाता है. इसके अलावा शारीरिक गतिविधियों की कमी, एक्स-रे से निकली किरणें भी इसकी वजह मानी जाती हैं।

अब बड़ा प्रश्न यह उठता है की आहिर इस घातक बीमारी के लक्षण क्या हैं? तो कैंसर के शुरुआती लक्षण इस पर भी निर्भर करते हैं कि वो शरीर के किस हिस्से में हुआ है. इनके अलावा सामान्य लक्षण हैं. जैसे, शरीर का वजन अचानक कम या ज्यादा होना, त्वचा में गांठ या किसी हिस्से में बार-बार नीला पड़ना, त्वचा में जल्दी निशान पड़ना, आवाज में बदलाव होना, निगलने में परेशानी होना, भूख कम लगना, कमजोरी होना, महीनेभर से खांसी या सांस लेने में कठिनाई होना. इस तरह के लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होता है। अब इससे बचाव कैसे किया जा सकता है? तो, कैंसर के जोखिम से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है. इसके अलावा धूम्रपान, शराब, अधिक वसा वाला खाना और डिब्बा बंद भोजन से बचें. रेडिएशन के संपर्क में आने से बचें. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें. तनाव न लें. तनाव की स्थिति में परिवार, दोस्तों से बात करें और उसे कम करने की कोशिश करें।

अन्य बीमारियों की ही तरह समाज में कैंसर को लेकर भी तमाम तरह के मिथ और अफवाह फैले हुए है, इसमें से कई मिथ को तो आप भी अब तक सच मानते आ रहे होंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के अफवाह, लोगों को भ्रमित कर सकते हैं, जिसके कारण कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। पहला, कैंसर का मतलब मौत निश्चित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लोगों के बीच कैंसर को लेकर फैली यह मिथ काफी गंभीर है। कैंसर हमेशा लाइलाज नहीं होता है। कैंसर के कारण होने वाली मौत का खतरा, रोग के प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है। कैंसर का पता लगाने और उपचार के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति ने इस दिशा में काफी बेहतर काम किया है। प्रारंभिक पहचान और उपचार के साथ, अधिकांश रोगियों की जान बचाई जा सकती है।

युवराज सिंह, संजय दत्त जैसे स्टार इसके उदाहरण हैं। दूसरा, कैंसर संक्रामक है, यह रोगी से दूसरों को भी हो सकता है। लोगों के बीच कैंसर की संक्रामकता को लेकर भी काफी भ्रम की स्थिति है। अक्सर लोग कैंसर रोगियों से मिलने या उनके निकट संपर्क में आने से कतराते हैं। पर ध्यान देने वाली बात यह है कि कैंसर छूत की बीमारी नहीं है। एकमात्र स्थिति जिसमें कैंसर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, वह है अंग या ऊतकों का ट्रांसप्लांटेशन। हालांकि वर्तमान में अंग प्रत्यारोपण को लेकर नियम बहुत कड़े हैं, इसमें डोनर की अच्छे से जांच की जाती है इसलिए यह भी एक दुर्लभ है।

तीसरा, बाल झड़ रहे हैं तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। अक्सर कैंसर रोगियों की तस्वीरों में उन्हें आपने गंजा देखा होगा, इसी आधार पर लोगों ने मानना शुरू कर दिया है कि बाल झड़ना, कैंसर का संकेत हो सकता है। हालांकि, इसे डॉक्टर पूरी तरह से अफवाह ही मानते हैं। डॉक्टर बताते हैं, बाल झड़ने की समस्या केवल कुछ कीमोथेरेपी दवाओं से संबंधित होती है।

कैंसर के उपचार के दौरान प्रयोग में लाए जाने वाले तरीकों के कारण बाल झड़ सकते हैं, लेकिन सिर्फ बाल झड़ने को  कैंसर का संकेत नहीं माना जा सकता है। चौथा, माइक्रोवेव में गर्म, खाना खाने से कैंसर होता है।माइक्रोवेव और कैंसर के खतरे के बारे में आपने भी जरूर सुना होगा, पर विशेषज्ञ इसे मिथ मानते हैं। माइक्रोवेब, भोजन को गर्म करने के लिए माइक्रोवेब विकिरण का उपयोग करता है इससे कैंसर का खतरा नहीं होता है। इससे गर्म भोजन करने से कैंसर होने के जोखिम का कोई संबंध नहीं है।

 

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