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जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओ का अंबार। कलेक्टर ने किया औचक निरीक्षण।

जिला चिकित्सालय शहडोल में लापरवाही,अनदेखी और अव्यवस्था की पोल शहडोल जिले की कलेक्टर वंदना वैद्य ने अचानक निरीक्षण कर खोल दी। यहां के एसएनसीयू (SNCU) वार्ड में लगातार कमियां उजागर होने के बाद भी उनमें सुधार के लिए प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लगातार कई बच्चों की मौत भी सोए हुए अस्पताल प्रबंधन को नहीं जगा सकी।

दरअसल, कलेक्टर बंदना वैद्य अचानक जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू वार्ड और लेबर रूम का निरीक्षण करने पहुंच गई। इस दौरान उन्हें वार्ड में अनेक कमियां मिली। SNCU वार्ड में निर्धारित गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा। एक्विपमेंट के मेंटेनेंस का रजिस्टर ही नहीं बनाया गया। केस सीट के साथ ही साफ-सफाई रजिस्टर भी पूरा नहीं मिला। भर्ती बच्चों की मृत्यु का बड़ा कारण सेप्सिस है जिसे रोकने के लिए सबसे जरूरी है सफाई और इनफेक्शन कंट्रोल। नियम के मुताबिक वार्ड में तीन शिफ्ट में सफाई होनी चाहिए, लेकिन इसमें भी लापरवाही बरती जा रही है। बच्चों का तीन बार परीक्षण करना और केस सीट में अंकित करना आना अनिवार्य है, लेकिन चिकित्सक द्वारा कई केस सीट अधूरी भरी जा रही है।

कलेक्टर ने सभी बिंदुओं पर सिविल सर्जन के नाम एक पत्र जारी किया। 8 बिंदुओं पर अलग-अलग कमियों का उल्लेख करते हुए उन्हें समय पर सुधारने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अपने पत्र में कमियों में सुधार न होने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्यवाही किए जाने का उल्लेख किया है। जिला अस्पताल में हर तरह की गड़बड़ी और लापरवाही पाई गई इलेक्ट्रिशियन का रजिस्टर मेंटेन नही है, गाइनेकोलॉजिस्ट की कमी होने से लेबर रूम से ज्यादातर प्रसुताओ को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।

इस तरह की कार्यशैली से कब तक लोगों की जान से खेला जाएगा। चेतावनी देने से अब इन लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता। दंडात्मक कार्यवाही की सख्त दरकार है।

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