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रेप का दोषी गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आखिर कैसे?

रोहतक की सुनरिया जेल (Sunariya Jail) में पिछले चार सालों से बंद डेरा प्रमुख (Dera Chief) राम रहीम को कोर्ट से तीन हफ्ते की फरलो मिली है. रेप और हत्या (Rape and Murder) के जुर्म में जेल के अंदर सजा काट रहे राम रहीम 25 अगस्त 2017 से ही सलाखों के पीछे है. राम रहीम को मां की बीमारी की वजह से फरलो दी गई है। गुरमीत राम रहीम ने परिवार के साथ रहने के लिए 31 जनवरी को सिरसा के डिविजनल कमिश्नर के पास फ़रलो के लिए अप्लाई किया था. उसी अर्ज़ी पर सरकार ने फ़रलो को मंज़ूरी दी है. राम रहीम 7 फरवरी से लेकर 27 फरवरी तक पैरोल पर रहेगा. गुरमीत राम रहीम ऐसे वक्त पर जेल से बाहर आ रहा है जब पंजाब में विधानसभा का चुनाव होने जा रहा है।

तो चलिए पहले जानते हैं की फरलो और पैरोल क्या है? फरलो और पैरोल में एक ही समझी जाने वाली दो अलग-अलग बातें हैं. जैस- फरलो उन सजायाफ्ता कैदियों को दी जाती है जो लम्‍बे समय से सजा काट रहे हैं. फरलो की अवधि को कैदी की सजा में छूट और उसके अध‍िकार के तौर पर देखा जाता है. यह बिना किसी वजह के भी दी जा सकती है. फरलो देने का मकसद होता है कि कैदी परिवार और समाज के लोगों से मिल सके. जेल में लंबा समय बिताने के दौरान शरीर में हुई किसी तरह की बीमारी का इलाज करा सके या उससे असर से निपट सके।

पैरोल में सजायाफ्ता कैदी को कुछ शर्तों के साथ रिहाई दी जाती है. यह एक निश्‍चित अवधि के लिए होती है. कैदी के आचरण और रिकॉर्ड को देखने के बाद भी यह तय किया जाता है कि उसे पैरोल पर भेजा जाना है या नहीं. इसके अलावा समय-समय पर उसे रिपोर्ट भी करना पड़ता है जो साबित करता है कि कैदी भागा नहीं है. इसे एक सुधारात्‍मक प्रक्रिया माना जाता है. यानी एक तरह से कैदी को सुधार का मौका दिया जाता है. संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन में उस कैदी को पैरोल लेने का आध‍िकार है जिसे कम से कम 18 महीने की सजा दी गई है और वह एक तिहाई सजा पूरी कर चुका है. वहीं भारत में पैरोल को कैदी के अध‍िकार के तौर पर नहीं देखा जाता है. कैदी की ओर से तमाम कारण दिए जाने के बाद भी पैरोल कैंसिल की जा सकती है। पैरोल को लेकर देश के राज्‍यों के अपने नियम हैं. जैसे- राजस्‍थान में  प्रारंभिक पैरोल 20 दिनों के लिए दी जाती है; दूसरी 30 दिनों के लिए और तीसरी 40 दिनों के लिए । इसके बाद कैदी स्थायी पैरोल के लिए आवेदन कर सकता है।

भारत में कारागार अध‍िनियम 1894 के तहत पैरोल दी जाती है. ऐसे कैदी जिन पर कई हत्‍याओं का आरोप है, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधि में शामिल रहे हैं और उन पर UAPA लगा है, ऐसे कैदियों को पैरोल पर भी रिहाई नहीं दी जा सकती. सामान्‍य पैरोल के इतर, इमरजेंसी की स्थिति में जेल सुपरिटेंडेंट को 7 दिन की पैरोल देने का अध‍िकार होता है।

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