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झूलती तारो से करंट लगने से ड्राईवर की दर्दनाक मौत।

साल 1950 तक 5 लाख भारतीय गाँवो में मात्र 3000 गांवों में बिजली के खंबे लगे थे। 1970 में भारत के बस 18% गांवों तक बिजली पहुंची। साल 1980 के बीच दो तिहाई गांवों में बिजली ने पहुंच बनाई और फिर 2018 में मोदी सरकार ने यह घोषणा की कि भारत के हर गांव में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। अब बिजली तो आपने पहुंचा दी लेकिन सड़कों, खंभों से झूलते तारों से लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेना आप भूल गए।

इन तारों से करंट लगने से जुड़ी मौतों की खबर लगातार सामने आती रहती है। हाल के मामले में अमरकंटक- बुढार मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत घिरौल में मुख्य मार्ग पर भारी मशीन लेकर जा रहा ट्रेलर सड़क के ऊपर से गुजरने वाली विद्युत तार के संपर्क में आ गया। हादसे में चालक की मौके पर ही मौत हो गई और क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया।

हादसे के बाद नाराज ग्रामीणों ने स्टेट हाईवे पर चक्का जाम कर दिया और बिजली विभाग के अधिकारियों पर प्रकरण दर्ज करने की मांग करने लगे। ग्रामीणों द्वारा पूर्व में भी झुलती हुई तारो बाबत शिकायत की गई थी। स्थिति यह है कि स्टेट हाईवे से लेकर गांव की गलियों तक बिजली के तार झूल रहे है, लेकिन अब तक ना तो इनका मेंटेनेंस किया गया और ना ही इस ओर ध्यान ही दिया गया।

लापरवाही की हद तब हो गई जब देवहरा पुलिस सहायता केंद्र को हादसे की सूचना देने के आधे घंटे तक बिजली को बंद नहीं किया गया। फोन करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची जिसके बाद पुलिस ने अपने वाहन में घायल को जिला चिकित्सालय पहुंचाया।मात्र एक जगह नहीं गांव में जगह जगह ऐसे तार झूल रहे हैं जिससे ग्रामीणों को जान का खतरा है। आखिर प्रशासन इस ओर कब ध्यान देगा?

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