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सिकलसेल मरीज़ो के लिए बड़ी खबर। प्रमाण बनने से मिलेगा आरक्षण, छूट और छात्रवृत्ति।

शहडोल संभाग में बड़ी तेजी से एक बीमारी अपने पैर पसार रही है, बीमारी का नाम है सिकलसेल । सिकलसेल रोग में लाल रक्त कोशिकाए यानी कि आरबीसी का आकार हंसिये याने कि सिकल जैसा हो जाता है। ये RBC कठोर और चिपचिपी होती है और हमारे शरीर के विभिन्न अंगों में खून का प्रवाह ठीक से नहीं होने देती जिसके कारण तेज़ दर्द होता है और अंगों को क्षति पहुंचती है। सिकल सेल से पीड़ित व्यक्ति का शारीरिक विकास सामान्य रूप से नहीं हो पाता। वजन और ऊंचाई सामान्य से कम होती है। खून की कमी, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ जैसी कई गंभीर समस्याएं रोगी में पाई जाती है।

आदिवासी क्षेत्रों के 4 जिलो अनुपपुर, डिंडौरी,अलीराजपुर और छिंदवाड़ा में प्रदेश के 75 फीसदी से ज़्यादा सिकलसेल के मरीज हैं। इन मरीजों की सहायता करने जिला स्वास्थ्य विभाग शहडोल और दिशा वेल्फेयर शहडोल आगे आये है। थैलेसीमिया और सिकलसेल मरीजों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के साथ-साथ उन्हें अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पहल की जा रही है। सिकलसेल से पीड़ितों को दिव्यांगता का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके साथ ही पेंशन, छात्रवृत्ति और आरक्षण में भी लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

वेलफेयर सोसाइटी की रुपाली सिंघई बताती है- 1995 के दिव्यांग कानून में सिर्फ 7 दिव्यांगता को जगह दी गई थी, लेकिन दिव्यांगता जन अधिकार कानून 2016 में 21 दिव्यांगता परिभाषित की गई है, जिनमें सिकलसेल शामिल है। दिव्यांग का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सबसे पहले जिला मेडिकल बोर्ड से दिव्यांगता का सर्टिफिकेट बनवाना होगा। उसके बाद स्वावलंबन पोर्टल पर अपने संबंधित दस्तावेज अपलोड करने होंगे, जिससे एक नया UDID कार्ड मिलेगा जो कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र के तौर पर देश भर में मान्य होगा।

कहा जा रहा है कि प्रमाण पत्र और कार्ड बन जाने से इलाज के लिए कहीं जाने पर रेलवे यात्रा भत्ते में छूट मिलेगी। इनकम टैक्स, दिव्यांग पेंशन, छात्रवृत्ति, पढाई और नौकरी में आरक्षण जैसी सुविधाएं मिलेंगी। हालाँकि इनका लाभ लेने के लिए दिव्यांगता का प्रतिशत कम से कम 40 या उससे अधिक होना चाहिए। नए कानून के मुताबिक दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण दिया जाता है।

शहडोल संभाग में सिकलसेल मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। इन योजनाओं और सुविधाओ कि उन्हें सख्त जरूरत है। नियम और योजनाएं तो खूब बना दी जाती है। लेकिन जमीनी स्तर पर अमल में लाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जाते। इस बात की गारंटी जरूर होना चाहिए कि दिव्यांग प्रमाण पत्र बनने के बाद लाभार्थी योजनाओं का लाभ सुचारु रुप से ले सके।

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