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Rupesh Pandey: लड़ाई धर्म की नहीं धर्म के नाम पर है!

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आता है तो मुस्लिम समुदाय में ज्यादातर फैसले के प्रति विरोध की प्रतिक्रिया बन जाती है और इसे इस्लाम व शरीयत से छेड़छाड़ से जोड़ दिया जाता है वहीं हिंदुओं के त्योहार दिवाली पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला दिल्ली और एनसीआर में पटाखे न जलाने पर आता है तो  हिंदू समुदाय के कुछ नुमाइंदों और उनके मानने वालों द्वारा इसे हिंदू त्यौहार को खत्म करने की साजिश करार दे दिया जाता है |आखिर क्यों हमारी सोच सिर्फ धर्म की भावना से नियंत्रित होती जा रही है ना की देश की भावना से क्योंकि देश की भावना में तो न्यायालय सर्वोपरि है जिसके आदेशों का उल्लंघन हम कर रहे हैं | जी हाँ ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है।

एक बार फिर धर्म के नाम पर पर इंसानियत झुकी और एक माता पिता को अपनी संतान खोनी पड़ी। जी हाँ। झारखण्ड में रहने वाले Rupesh Pandey जिनकी उम्र सिर्फ 17 वर्ष बताया जा रहा है। जो अपनी माँ बाप की एक लोती संतान थे, वह सरस्वती विसर्जन के जुलुस में थे और उन्हें कुछ मुस्लिम लड़को ने बेरहमी से पीट कर जान से मार दिया। ये डरावनी घटना झारखण्ड के हज़ीराबाग ज़िले की हैं जिस जगह Rupesh Pandey को कुछ मुस्लिम वर्ग के लड़को ने जिनके नाम मोहम्मद असलम, मोहम्मद अनीस, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद गुफरान, मोहम्मद चंद, मोहम्मद ओसामा, मोहम्मद एहतम और मोहम्मद नाहिद ने Rupesh Pandey को सरस्वती विसर्जन के समय को बेरहमी से मार डाला।

सरस्वती विसर्जन की शाम को हजारीबाग के बरही थाना में नईटांड गाँव में लखना दूलमाहा इमामबाड़ा के पास से जुलूस जा रहा था । तब भीड़ में कुछ मुस्लिम लड़को ने धर्म के नाम पर कटाक्ष शब्द कहे जिनको जवाब देने पर Rupesh pandey से कहा-सुनी हो गई और वही उस वक़्त मुस्लिम वर्ग ने मारा पिटाई शुरू कर दी और Rupesh Pandey को बहुत चोटे आयी अस्पताल पहुंचने तक रुपेश अपनी जान गवा चूका था।  जैसे ही रुपेश की खबर उसके ज़िले में फैली तो पूरा गांव जैसी आग बबूला हो गया और न्याय की आग लेकर सड़को पर निकल गए वही सोशल मीडिया पर Justice for Rupesh Pandey को लेकर लोग मांगे करने लगे।

दूसरी तरफ घटना स्थल से लेकर लखना दूलमाहा इमामबाड़ा तक लोग पथराव करने लगे और धर्म के नाम पर नारे लगाने लगे यहाँ तक की आस पास की सम्पति और गाड़ियों में आग लगा दी ।इन सबके बाद राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाये और शान्ति बनाने की मांग कर इंटरनेट की सेवा भी बंद करवा दी क्यूंकि इस तरीके के खबर को लेकर लोग अफवाहो का ढेर लगाने से नहीं चूकते झारखंड पुलिस भी पूरे केस की छानबीन कर रही हैं और साथ ही सारे दोषियों को हिरासत में ले लिया हैं।

हजारीबाग सदर के भाजपा विधायक मनीष जायसवाल के संज्ञान में यह मामला आते ही वो अपने समर्थकों और आम जनता के साथ मृतक के परिजनों से मिले और उसके दाह-संस्कार कार्यक्रम में उपस्थित होकर रूपेश को श्रद्धांजलि दी। विधायक ने पीड़ित परिजनों से मिल बाते की और मांग की है कि…
दोषियों पर। मॉब लिंचिंग कानून के तहत कार्रवाई हो। फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से स्पीडी ट्रायल द्वारा दोषी लोगों को जल्द से जल्द सजा मिले। परिवार को ₹50 लाख मुआवजा दी जाए। अब देखने वाली बात यह होगी की आखिर कब तक रूपेश पांडेय के परिवार जन को इंसाफ मिल पाता है। बात केवल इतनी नही है बल्कि आज चाहे वह धर्मगुरु हो या राजनीतिक दल हो या उनके नेताओं या  पत्रकार और लेखक हो सारे के सारे एक सोच की मानसिक समस्या से ग्रसित होते जा रहे हैं।

जब तक धर्म की मूल भावना को हम नहीं समझेंगे तब तक धर्म का असल में मायनें नहीं है और इसके लिए पहले स्वयं को समझना और फिर धर्म का धारण करना ही असल में सभी धर्मों का प्राथमिक ज्ञान  है ना की धारणाओं से ग्रसित होकर धर्म धारण करने से हम सिर्फ धर्म के नाम पर ही लड़ेंगे ना कि धर्म की सुनेंगे | आज विश्व में धर्म के नाम पर ही अलगाववाद, आतंकवाद जारी है |

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