Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

संत रविदास के नाम पर राजनीतिक फायदे की कवायद।

प्रधानमंत्री मोदी की एक वीडियो सुबह से वायरल हो रही है जिसमें वे कीर्तन करती महिलाओं के साथ झूमते हुए नजर आ रहे हैं। यह वीडियो दिल्ली के श्री गुरु रविदास विश्राम धाम मंदिर का है। आज रविदास जयंती के उपलक्ष में प्रधानमंत्री मोदी इस मंदिर में पहुंचे। मंदिर के विजिट रजिस्टर में उन्होंने एक संदेश लिखा ‘महान संत गुरु रविदास जी की जयंती के अवसर पर उनकी इस पावन स्थली पर शीश झुकाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज के विशेष दिन उनका आशीर्वाद प्राप्त कर कृतार्थ हुआ।

जात- पात छुआछूत जैसी कुप्रथाओ को समाज से दूर करने के लिए समर्पित उनका जीवन हम सबके लिए प्रेरणादयी है।
संत रविदास जी तो जात पात से दूर रहने की बात 16वीं शताब्दी में ही कह गए। लेकिन भारत में आज भी उनके नाम पर जातिगत राजनीति की जा रही है।संत रविदास का जन्म हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन हुआ था जो कि इस साल 16 फरवरी को यानी आज है। संत रविदास का जन्म चर्मकार कुल में हुआ था। वे जूते बनाने का काम करते थे। संत रविदास जाति के बजाय मानवता में यकीन करते थे। उन्हें कबीरदास का समकालीन और उनका गुरुभाई कहा जाता था। उन्होंने 40 पदों की रचना की जिसे सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल किया गया। कहा जाता है कि उनके शिष्यों में हर जाति के लोग शामिल थे।

संत रविदास की जन्म स्थली वाराणसी में उनका भव्य मंदिर है। पंजाब के लोगों में इस मंदिर की बड़ी मान्यता है और बड़ी संख्या में अनुयाई यहां आते हैं। रविदास जयंती के चलते पंजाब में चुनाव तक आगे बढ़ाएं ताकि श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने आ सके। पंजाब में 20 फरवरी को मतदान होना है। राज्य में अनुसूचित जाति के लगभग 32% मतदाता है। लगता है राजनीतिक पार्टियां उत्तर प्रदेश चुनावो से लेकर पंजाब विधानसभा चुनावों तक दलितों को साधने की कोशिश में जुटी हुई है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी है। कांग्रेस के राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी वाराणसी मत्था टेकने पहुंचे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी रविदास मंदिर पहुंचकर लंगर छका। राजनीति में नेताओं की कोई भी बात कोई भी दौरा बिना राजनीतिक फायदे के नहीं होता। यहां भी यही साधने की कवायद है।
जन्म जात मत पूछिए , का जात और पात। रैदास पूत सम प्रभु के कोई नहीं कुजात।

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

साझा करें

ताजा खबरें

सब्सक्राइब कर, हमे बेहतर पत्रकारिता करने में सहयोग करें