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ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) क्या है? कैसे हुई बप्‍पी लाह‍िड़ी की मौत?

आज तरह-तरह की बीमारियां हमारे चारों तरफ फैली हुई हैं। और दुनिया भर में लोग किसी न किसी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसका एक बड़ा और अहम कारण आपकी जीवनशैली हो सकती है। अस्त-व्यस्त दिनचर्या और असंतुलित खानपान आपको कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की तरफ धकेल सकता है। संपूर्ण सेहत के साथ-साथ अपने श्वसन तंत्र को स्वस्थ बनाये रखना भी बहुत जरुरी है। सांस लेने के लिए भी हम इसका ही सहारा लेते हैं। क्योंकि बिना सांस लिए आपका जी पाना संभव नहीं है। सांस से जुड़ी ऐसी ही कुछ स्तिथि है जिसका नाम है ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया। जी हाँ, इसी कारण से भारत के मशहूर गायक बपी लहरी इस दुनिया में नही रहे।

इस वजह से रात में कई बार नींद खुलती है. इस समस्या में किसी व्यक्ति की सांस अचानक कुछ सेकेंड के लिए थम जाती है और फिर अपने आप चलने लग जाती है. ऐसा रात में एक या दो बार होता है. कई लोगों को यह 10 से 12 बार भी हो सकता है. डॉ. के मुताबिक, स्लीप एपनिया तीन प्रकार के होते हैं. इनमें पहला होता है ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, दूसरा सेंट्रल स्लीप एपनिया और तीसरी होता है कॉम्पलेक्स स्लीप एपनिया. इनमें सबसे आम ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया ही होता है. यह बीमारी तब होती है जब किसी व्यक्ति की जीभ और सोफ्ट पैलेट काम नहीं करती है तो सांस लेने वाली नली छोटी हो जाती है. कई मामलों में यह कुछ सेकेंड के लिए पूरी तरह बंद भी हो जाती है. इससे सांस लेने में परेशानी हो जाती है. शुरुआती चरण में यह बीमारी ज्यादा घातक नहीं होती है. रात को सोते समय बस कुछ समय के लिए अचानक से यह दिक्कत होती है और ठीक हो जाती है, लेकिन अगर इस बीमारी पर ध्यान नहीं दिया जाता तो, धीरे-धीरे यह बढ़ने लगती है।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण नींद खराब हो जाती है. रात में कई बार व्यक्ति को उठना पड़ता है. इससे वह अगले दिन थकावट और सुस्ती महसूस करते हैं. अगर किसी को कई महीनों से लगातार स्लीप एपनिया हो रहा है. तो उससे मानसिक सेहत (Mental Health) पर भी असर पड़ता है. इससे पीड़ित व्यक्ति को डिप्रेशन, तनाव, घबराहट, चिंता, किसी काम में मन न लगना जैसी परेशानियां का भी सामना करना पड़ता है. शारीरिक परेशानी के साथ-साथ मानसिक समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी इस जानलेवा स्थिति के लक्षणों में तनाव, हर समय थकान रहना, एसिडिटी, उच्च रक्त चाप, दम घुटने के साथ अचानक नींद खुल जाना, दिन के समय ज्यादा नींद आना, रात में सोते वक़्त पसीना आना, सोकर उठने पर मुँह और गले में ड्राइनेस फील करना, चीजों को अक्सर भूल जाना आदि शामिल हो सकते हैं। इसलिए जिन लोगों का स्लीप पैटर्न बहुत ख़राब है और रात में खर्राटे आते हैं, उन्हें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

एहतियाती उपाय जैसे वजन कम करना, नियमित व्यायाम, नींद की स्वच्छता (प्रत्येक दिन एक ही समय पर बिस्तर पर जाना), प्रत्येक दिन एक ही समय पर बिस्तर से उठना, सोते समय शयनकक्ष को शांत रखना, शयनकक्ष को सुविधाजनक बनाने के लिए पर्याप्त अंधेरा रखना, बिस्तर में ना पढ़ना या बिस्तर में टेलीविजन ना देखना, सोने से ठीक पहले व्यायाम ना करना, शाम को कैफीन ना लेना, मोबाइल स्क्रीन को ना घूरना) और स्लीप एपनिया के सही कारणों की त्वरित पहचान और उपचार दोनों वयस्कों और बच्चे में स्लीप एपनिया को ठीक करने में मदद कर सकते हैं। उपरोक्त के अलावा, वयस्कों में धूम्रपान/शराब के सेवन से परहेज की स्थिति से प्रभावित होने की संभावना को कम कर सकती है।

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