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#Justiceforharsha क्या है? फिर एक बार धर्म के नाम पर खून खराबा

इन दिनों सोशल मीडिया पर justiceforharsha हेशटैग प्रचलित होता हुआ नज़र आ रहा है। क्या है पूरा मामला? क्या हिजाब कान्ट्रवर्सी से जुड़ा हुआ? क्या फिर एक बार धर्म के नाम पर आक्रोश नज़र आया? और भी कई सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिए। तो कर्नाटक में हुई बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या के बाद आरोपितों की गिरफ्तारी की खबरों के बीच इनके नाम का खुलासा हुआ है। कुछ ट्विटर हैंडल्स पर दावा किया जा रहा है कि गिरफ्तार हुए आरोपितों के नाम काशिफ और सैयद नदीम हैं। पुलिस ने इनकी पहचान उजागर नहीं की है। लेकिन, कल तीन लोगों के गिरफ्तार होने की बात सामने आई थी।

तो जानने की कोशिश करते हैं की आखिर यह justiceforharsha का पूरा मामला क्या है? हिजाब विवाद पर संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा। ये मामला आए दिन कुछ ऐसा मोड़ ले रहा है कि इस पर बवाल बढ़ता ही चला जा रहा है। . बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा की रविवार देर रात भारती कॉलोनी में रविवर्मा स्ट्रीट के पास बेरहमी से हत्या की गई। हर्षा पेशे से एक दर्जी था। वो जिले में बजरंग दल का ‘प्रकंद सहकार्यदर्शी’ (समन्वयक) का पद भी संभालता था। पुलिस ने बताया कि हर्षा ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर हिजाब के खिलाफ पोस्ट लिखी। उन्होंने भगवा शॉल का सपोर्ट किया था। दरअसल, कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद के बीच कुछ कार्यकर्ता पहनकर अपना विरोध जता रहे थे। कहा जा रहा है कि हर्षा को लगातार धमकी भरे फोन आ रहे थे और जान से मारने की धमकी मिली थी। जानकारी के मुताबिक कार में आए कुछ लोग हर्षा का कार से पीछा कर रहे थे। उन्होंने घातक हथियारों से हमला कियाऔर मौके से फरार हो गए। इस घटना के बाद हर्षा को अस्पताल में ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। हर्षा बजरंग दल और विहिप की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस थाने में पूछताछ के दौरान काशिफ ने माना कि वह अपने 4 साथियों के साथ मिलकर हर्षा को मारने कार में आया था। हर्षा रविवार को कैंटीन में चाय पी रहा था। वहीं उस पर धारधार हथियार से वार किए गए। इसके बाद वो सब घटनास्थल से फरार हो गए। अब आगे की पूछताछ के लिए दो आरोपितों को शिवमोगा बाहर ले जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। इस बीच हर्षा की बहन ने जहाँ बताया कि उनका भाई श्रीराम का नाम जपते-जपते हिंदुओं के लिए मरा। वहीं मृतक के भाई ने बताया है कि हर्षा संगठन के काफी सक्रिय सदस्य थे। वह हिंदुओं के बारे में सोचते थे जिसकी वजह से उन्हें मरना पड़ा। बता दें कि हर्षा की हत्या ने एक बार फिर से देश में कट्टरपंथी संगठनों को बैन करने की माँग को तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पर जस्टिस फॉर हर्षा ट्रेंड हो रहा है। इस हैशटैग में हर्षा के लिए न्याय माँगते हुए लोग माँग कर रहे हैं कि पीएफआई, एसडीपीआई, सीएफआई को देश भर में बैन किया जाए। वरना हिंदुओं की लिंचिंग सामान्य होती जाएगी।

इस संबंध में लोकसभा सदस्य व भाजपा नेता प्रताप सिम्हा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा है कि हर्षा की हत्या के बाद उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि राज्य में बीजेपी की सरकार है फिर भी ये सब नहीं रुक पा रहा। इससे पहले बंतवाला में प्रशांत पुजारी ने अपनी जान से हाथ थोड़ा। फिर सूरतकल में दीपक राव, बंगलुरु मं संतोष, मैसूर में राजू, कुशलनगर में प्रवीण पुजारी, कुत्तापा और उत्तर कन्नड में पराज मेश्ट्रू। उन्होंने याद दिलाया डीजी हल्ली और केजी हल्ली घटनाओं को। जहाँ पुलिस के साथ सामान्य जन कट्टरपंथियों द्वारा निशाना बनाए गए। सरकार ने वादा किया कि आरोपितों को पकड़ा जाएगा। एसडीपीआई और पीएफआई को बैन किया जाएगा। अब जब से हिजाब का मुद्दा शुरू हुआ है तभी से बेचैनी और असुरक्षा का भाव है।

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