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घोटालों में रिकॉर्ड बनाता भारत! गुजरात में 6000 करोड़ का कोयला घोटाला।

देश में नित नए उजागर होते घोटालों में एक और घोटाले कोयला घोटाले का नाम सामने आ रहा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बीते 14 साल में गुजरात सरकार की कई एजेंसियों ने राज्य की स्मॉल और मीडियम लेवल इंडस्ट्रीज को कोयला देने के बजाय दूसरे राज्य के उद्योगों को ज्यादा कीमत पर बेचकर 5000 से 6000 करोड़ रुपए का घोटाला किया है।

इस मामले में केंद्र सरकार की 2008 में लागू की गई नीति कहती है कि देश भर के छोटे उद्योगों को सस्ती दरों पर अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला मुहैया कराया जाना चाहिए। इसी नीति के तहत गुजरात की स्माल इंडस्ट्रीज के लिए हर महीने कोल इंडिया के वेस्ट कोलफील्ड और साउथ ईस्ट कोलफील्ड से कोयला निकाल कर भेजा जाता है।

इस प्रक्रिया में सबसे पहले गुजरात सरकार का उद्योग विभाग कोल इंडिया को जरूरत के हिसाब से कोयले की मात्रा सहित विवरण की एक सूची भेजता है। इसी में राज्य मनोनीत एजेंसी SNA की सूची भी रहती है जो कोल इंडिया से कोयला लेकर राज्य के लाभार्थियों,लघु उद्योगों और छोटे व्यापारियों तक पहुंचाने के लिए अधिकृत है। खास बात यह है कि यह एजेंसी परिवहन और कोयले की लागत पर 5% की दर से ही सेवा कर वसूल सकती है और कारोबारियों या छोटे उद्योगो को सालाना 4200 टन या उससे कम का कोयला बाजार मूल्य से कम कीमत पर मुहैया कराती है।

लेकिन सब नियमों, नीतियों को बाजू में रखकर बड़ी चतुराई से कोल इंडिया की खदानों से गुजरात के छोटे उद्योगों के नाम पर 60 लाख टन कोयले को ज्यादा कीमत पर अन्य राज्यों में बेचा गया है। छोटे व्यापारियों, उद्योगों को भेजे गए इस कोयले की औसत कीमत 1800 करोड़ रुपए होती है, लेकिन इसे अवैध रूप से अन्य राज्यों में बेचकर लगभग ₹6000 करोड़ का घोटाला किया गया है। इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कुछ डमी या लापता एजेंसियां बनाई गई। उन्हीं के नाम पर यह अवैध धंधा किया गया।

लेकिन इतने सालों तक यह बात गुजरात सरकार के अधिकारियों पदाधिकारियों के संज्ञान में नहीं आई ये थोड़ा संदेहास्पद लगता है।घोटाले करने में गुजरात सरकार के अधिकारी ही मुख्य भूमिका में दिख रहे हैं। सरकार की ओर से कोल इंडिया को जो सूची भेजी गई वहीं फर्जी है। जिन लाभार्थियों को कोयला भेजने के लिए सूचीबद्ध किया गया है, उन्हें इस तरह सस्ते में कभी कोयला मिला ही नहीं। लाभार्थियों की सूची तो भेजी गई, कोयला खदान से निकला भी लेकिन असली लाभार्थियों तक ना पहुंच कर कहीं और ही पहुंच गया। गुजरात सरकार द्वारा नियुक्त की गई एजेंसियों का पता ग़लत है। नाम, टेलीफोन नंबर, ईमेल झूठे हैं।

जब कोल इंडिया की वेबसाइट पर खुले तौर पर यह जानकारी देखी जा सकती है तो अब तक जिम्मेदारों की नजर में यह गड़बड़ घोटाला क्यों नहीं आया।क्या है कि हमारे देश की जनता को ही नहीं पता की यह पैसा जनता का है। उसके मेहनत की कमाई से भरे गए टैक्स का है। हम खबरे जरूर बना देंगे, आपको जानकारी भी दे देंगे, उससे फर्क पड़ेगा लेकिन बदलाव तब आएगा जब आप आप जागरूक होंगे, ऐसे घोटाले पर सरकार से जवाब मांगेंगे।

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