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Ukraine Crisis: तीसरे विश्व युद्ध की आहट

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने यूक्रेन (Ukraine) के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दे दिया है. साथ ही यूक्रेन की सेना से हथियार डालने का आह्वान किया है। जानकारी के मुताबिक पुतिन ने कहा है कि रूस की यूक्रेन पर कब्जा करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन रूस किसी भी बाहरी खतरे का तुरंत जवाब देगा. इस बीच यूक्रेन की राजधानी कीव में बलास्ट होने की जानकारी सामने आई है. संकट के बीच यूक्रेन ने बुधवार को देशव्यापी आपातकाल की घोषणा कर दी. यूक्रेन संकट को लेकर फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) यूक्रेन पर आपातकालीन सत्र चल रहा है. इस सप्ताह में यह दूसरी बार होगा, जब यूक्रेन पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बैठक हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी.एस. तिरुमूर्ति ने कहा है कि हम तत्काल डी-एस्केलेशन का आह्वान करते हैं, स्थिति एक बड़े संकट में तब्दील होने के कगार पर है. अगर इसे सावधानी से नहीं संभाला जाता तो यह सुरक्षा को कमजोर कर सकता है. सभी पक्षों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाना चाहिए. यूक्रेन की ताजा स्थिति के बीच यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस (यूआईए) की एक स्पेशल फ्लाइट छात्रों सहित 182 भारतीय नागरिकों के साथ आज सुबह 7:45 बजे कीव से दिल्ली हवाई अड्डे पर लैंड हुई है।

UN में अमेरिका ने कहा है कि हम रूस की कार्रवाई का एकता के साथ जवाब देना जारी रखेंगे. हम यहां रूस को रुकने, अपनी सीमा पर लौटने, सैनिकों को वापस बैरक में भेजने के लिए कहने आए हैं. अपने राजनयिकों को वार्ता की मेज पर लाएं. रूस ने सचमुच यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन किया है. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि रूस की ओर से एक ऑपरेशन तैयार किया जा रहा है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने सैनिकों को यूक्रेन पर हमला करने से रोकें. शांति को एक मौका दें।

रूस ने यूक्रेन स्थित अपने सभी राजनयिक प्रतिष्ठानों से कर्मियों को निकालना शुरू कर दिया है. मॉस्को का कीव में दूतावास है और खार्किव, ओडेसा और ल्वीव में वाणिज्य दूतावास हैं. तास की खबर में कहा गया है कि कीव में दूतावास ने पुष्टि की है कि निकासी शुरू हो गई है. वहीं, कीव में एसोसिएटेड प्रेस के एक फोटो पत्रकार ने देखा कि अब कीव में दूतावास भवन में झंडा नहीं लहरा रहा। बता दें कि व्लादिमीर पुतिन को अपने देश के बाहर सैन्य बल का उपयोग करने की हरी झंडी मिल गई और पश्चिमी देशों ने इसका जवाब कई तरह के प्रतिबंध लगाकर दिया है. विनाशकारी युद्ध से कूटनीतिक तरीके से बाहर निकलने की उम्मीदें दिखाई तो दे रही थीं, लेकिन वे सभी असफल प्रतीत हुईं. अमेरिका और प्रमुख यूरोपीय सहयोगियों ने मास्को पर यूक्रेन अलगाववादी क्षेत्रों में रूसी सैनिकों के प्रवेश को एक लाल रेखा को पार करना बताया.

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