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Gurugram Apartment Collapse: आखिर कैसे चंद सेकंड में ऊंची इमारतों में रहने के सपने चकना चूर हो गए?

बड़े शहरों में जमीन की कमी और कीमतें बढ़ने की वजह से एक घर लेना मुश्किल ही नही नामुमकिन होता चला जा रहा है, लेकिन आप ही सोचिए की यदि आप की मेहनत से बनाया हुआ एक लंबा मकान एक दिन चकना चूर हो जाए तो, तो क्या आप उस दर्द को सह पाएंगे? नही ना, ऐसा ही कुछ हुआ गुरुग्राम हादसे में। जी हाँ, जैसे हम सभी को ही आजकल पता है की हम सभी आजकल आसमान छूती इमारतों में रहने लगे हैं। गुरुग्राम हादसे (Gurugram Building) के बाद पूरे एनसीआर की सोसाइटियों में इस बात की चर्चा है कि ऐसा क्या हुआ कि एक के बाद एक 7 फ्लोर ढहते चले गए। क्या बिल्डर ने घटिया सामान लगाया था? कौन है इसके लिए जिम्मेदार? सेक्टर 109 की चिंटल पैराडिसो सोसाइटी (Chintels Paradiso) में यह हादसा हुआ। 

दिन था 10 फ़रवरी, गुरुवार शाम साढ़े छह बजे। सोसाइटी के डी टावर के आठवें फ्लोर पर काम चल रहा था। बताते हैं कि उसके चलते अचानक सातवीं से पहली मंजिल तक की छत और फर्श नीचे आ गिरे। मतलब, सात फ्लोर की छतें टूटकर पहली मंजिल के फ्लैट पर आ गईं। यह उन लोगों के लिए पहाड़ टूटकर गिरने जैसा रहा होगा, जो मलबे में दब गए। छठवें फ्लोर पर सबसे पहले छत टूटी वहां कोई नहीं रह रहा था। हालात ऐसे बन गए कि बचाव कार्य के लिए गाजियाबाद से एनडीआरएफ की आठवीं बटालियन को भेजा गया। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है।

जोरदार आवाज सुनते ही सामने ई-टावर के लोग दौड़कर बाहर निकले तो देखा कि फ्लैट नंबर डी-103 का ड्राइंग रूम मलबे से भरा है। पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई। 2 लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचा गया। डी-टावर में रहने वाले लोगों से वहां से जल्दी निकलने को कहा गया। सभी को क्लब हाउस में ठहराया गया है। पूरी इमारत खाली करा ली गई है। सुबह भी राहत कार्य जारी है।

उस टावर की पहली और पांचवीं मंजिल पर फ्लैट्स में परिवार शिफ्ट हो गए थे। गनीमत यह थी कि दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल के फ्लैट्स में कोई नहीं रह रहा था। पांचवीं मंजिल में रहने वाला परिवार घटना के समय घर पर नहीं था। पहले फ्लोर पर पीएमओ में कार्यरत अधिकारी रहते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह परिवार गुरुवार को ही कहीं बाहर से आया था। हादसे के वक्त पति और पत्नी ड्राइंग रूम में बैठे थे जबकि महिला की बहन वॉशरूम गई हुई थी।

दरअसल, ऊंची इमारतें पिलर पर खड़ी होती हैं और यहीं से उनकी मजबूती तय होती है। ऐसे में जब छत टूटी तो पिलर के सहारे खड़ी बिल्डिंग को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

एनडीआरएफ के लिए भी बचाव कार्य आसान नहीं है। एक शख्स मलबे में इस तरह फंसा था कि उसका इलाज उसी स्थिति में शुरू करना पड़ा। सोसाइटी के लोग बिल्डिंग की क्वॉलिटी पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलोनी के 4 रिहायशी टावर का स्ट्रक्चर ऑडिट हुआ था लेकिन उसमें यह टावर शामिल नहीं था। हादसे के बाद इसी सोसाइटी में हीं नहीं, जिसे भी खबर मिली वह टेंशन में आ गया। बताया जा रहा है कि चार साल पहले यह टावर बनकर तैयार हुआ था। परिसर में तीन अन्य टावर हैं। 18 मंजिला टावर डी में चार बेडरूम के अपार्टमेंट हैं। आवास परिसर प्रबंधन ने शाम सात बजे के आसपास हुई इस बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए मरम्मत के दौरान लापरवाही को जिम्मेदार बताया।

अब प्रशासन पर बड़ा सवाल यह उठ कर के आता है, की आखिर क्यूँ ऐसे हादसे होते रहते हैं? आखिर क्यूँ लोगों के सपने चंद सेकंड में चकना चूर हो जाया करते हैं, अब देखने वाली बात यह होगी की आखिर कब तक प्रशासन इस विषय पर ध्यान पूर्वक काम करती है।

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