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क्या होगी पुतिन की जिद की कीमत? क्या पुतिन ने कर रखी है पहले से तयारी?

यूक्रेन पर हमला करने के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के फैसले के बाद रूस को कई मोर्चों पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है. इससे न सिर्फ रूस की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है बल्क‌ि कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. वहां के शेयर बाजारों में गिरावट का दौर जारी है. इससे रूस के अरबपतियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. आलम यह है कि उनकी संपत्तियों में भारी गिरावट आई है।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, दुनिया के टॉप-500 अमीरों में शामिल रूस के अरबपतियों की कुल संपत्ति में अब तक 83 अरब डॉलर की गिरावट आ चुकी है. इसकी प्रमुख वजह रूस के शेयर बाजारों में भारी गिरावट है. बाजार में इतनी ज्यादा गिरावट आई कि रूस के केंद्रीय बैंक को ट्रेडिंग तक रोकनी पड़ी.

पश्चिमी देशों ने कुछ प्रतिबंधों का तो एलान कर ही दिया है और जो बाकी है उनमें रूस को वैश्विक भुगतान तंत्र स्विफ्ट से अलग करना है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को कहा कि यूरोप ने अभी इस कदम पर फैसला नहीं किया है. रूसी राष्ट्रपति ने इस आशंका से बचने के लिए रूस में अच्छी खासी तैयारी की है. खासतौर से विदेशी मुद्रा के भंडार को बढ़ा कर वो इस डर को अपने दिमाग से निकाल देना चाहते हैं. फिलहाल रूस के पास करीब 640 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के रूस विशेषज्ञ ओलेग इग्नातोव कहते हैं, “विशाल मुद्रा भंडार, तेल की बढ़ती कीमत और जीडीपी के मुकाबले कम कर्ज का अनुपात रूस की तुरंत लगने वाले प्रतिबंधों से रक्षा करेंगे…हालांकि लंबे समय में इनके कारण देश में आर्थिक जड़ता आएगी.”

रूस दुनिया में कच्चे तेल के सबसे बड़े उत्पादक देशों में है. 2014 के बाद इसने इस दिशा में काफी ज्यादा प्रगति की है और हमले के बाद तो यह उस स्तर पर पहुंच गया है जहां इससे पहले कभी नहीं रहा. बीते कई हफ्तों से रूस और पोलैंड के बीच पाइपलाइन से आने वाले गैस की सप्लाई कम हो रही थी लेकिन शुक्रवार को यह अचानक चार गुना बढ़ गई. ऐश ने गुरुवार को रूसी शेयर बाजार में भारी गिरावट की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारी प्रतिबंधों के कारण रूस “वैश्विक बाजार में अछूत बन जाएगा और निवेश के लायक नहीं रहेगा.”

रूसी राष्ट्रपति के दफ्तर क्रेमलिन का कहना है कि उसने इस स्थिति का अनुमान पहले ही लगा लिया था. क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, “इस भावुक लम्हे को जितना मुमकिन है उतना तात्कालिक रखने के लिए सारे जरूरी उपाय पहले ही कर लिए गए हैं.” पेस्कोव ने राजनयिक असर को भी कम कर के दिखाने की कोशिश की. पेस्कोव का कहना है, “निश्चित रूप से कुछ देशों के साथ हमें समस्या होगी लेकिन हम इन देशों के साथ पहले से ही समस्याओं का सामना कर रहे हैं.”

बेलारूस तो इस हमले में अपनी जमीन का इस्तेमाल होने दे रहा है और कजाखस्तान ने भी रूस का समर्थन किया है. मतलब साफ है कि पश्चिमी देश, अमेरिका और उनके सहयोगी जितना इसे एकतरफा मामला बता रहे हैं, यह उतना है नहीं. दूसरी तरफ पुतिन बहुत पहले से खुद को और देश को इन परिस्थितियों के लिए तैयार करते रहे हैं. ऐसे में उनका टीवी पर आकर परमाणु हथियार के इस्तेमाल की धमकी देना भी अब दुनिया को हैरान नहीं करता. ऐसा लगता है कि वो मान चुके हैं कि दुनिया में अब वो अकेले ही हैं.

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