WOMEN RIGHTS
Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

महिलाओ के अधिकार, जो वे जानती ही नहीं!

महिलाओं के सम्मान,उनके समाज के प्रति योगदान, उनकी अस्मिता और उनकी पहचान को समर्पित दिन है विश्व भर में मनाया जा रहा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस। इतिहास में झांकने पर पुराने समय में महिलाओं की स्थिति काफी खराब कही जा सकती है। आज के वक्त में तब जैसे सती प्रथा, देवदासी प्रथा जैसी क्रूर परंपराएं तो नहीं है, लेकिन आज भी महिलाओं को उत्पीड़न, लिंग के आधार पर भेदभाव, छेड़छाड़ जैसी अनेक मुश्किलें झेलनी पड़ती है।

क्या आप जानती हैं कि आपके लिए, आप के हितों की रक्षा के लिए भारतीय संविधान आपको कई अधिकार प्रदान करता है? ज्यादातर महिलाओं को इन अधिकारों के बारे में पता ही नहीं है। जिनके लिए इन अधिकारी को बनाया गया उन्हें ही अगर इनके बारे मे नहीं पता फिर इन अधिकारों का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आज हम महिलाओं से जुड़े भारतीय कानूनों के बारे में बता रहे हैं जिनकी जानकारी हर महिला को होनी चाहिए।

  • कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न( रोकथाम निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 के अनुसार किसी भी तरह के यौन उत्पीड़न जैसे जबरदस्ती शारीरिक संपर्क, अश्लील टिप्पणियां आदि करने पर आप संबंधित पुरुष मालिक या सहयोगी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती हैं। इस मामले में कड़ी सजा का प्रावधान है।
  • महिलाओं को पुरुषों के समान काम के लिए समान वेतन देने के लिए समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 पारित किया गया है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के अंतर्गत सार्वजनिक स्थान पर अपशब्द कहने,अश्लील गाने बजाने पर आप उनके खिलाफ शिकायत कर सकती है।
  • धारा 313 के अंतर्गत महिला की इच्छा के खिलाफ गर्भपात करवाना कानूनन जुर्म है।
  • मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2017 कहता है कि गर्भावस्था के दौरान काम करने वाली प्रत्येक महिला कर्मचारी को 12 से 26 सप्ताह तक मातृत्व अवकाश, घर से काम करने की सुविधा आदि देना अनिवार्य है।
  • हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम 2005 सभी हिंदू महिलाओं को पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा लेने का अधिकार देता है।
  • इसके अलावा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दहेज लेना और देना दोनों कानूनन अपराध है।

ये बात कहना ग़लत होगा कि महिला के लिए कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं या कोई कानून नहीं है, लेकिन इनकी मांग करने पर, अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग भर से महिलाओं को कई सामाजिक और मानसिक दबाव और प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। उसकी लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ ना होकर पूरे समाज और व्यवस्था के खिलाफ हो जाती है। सामने आने पर पीड़ित महिला को घृणित नजरों से देखा जाता है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर इसी घटिया सोच और व्यवस्था को बदलने की आवश्यकता है।

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

साझा करें

ताजा खबरें

सब्सक्राइब कर, हमे बेहतर पत्रकारिता करने में सहयोग करें