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वाराणसी में EVM की मूवमेंट पर सवाल, धांधली करना हैं नामुमकिन!

पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव की मतगणना शुरू होने से पहले एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों यानी ईवीएम (EVM) की विश्वसनीयता पर कुछ लोग सवाल खड़े कर रहे है. हालांकि चुनाव आयोग ने यह कई बार स्पष्ट किया है कि ईवीएम से मतदान प्रक्रिया बेहतर हुई है. ईवीएम को हैक करना असंभव है, क्योंकि यह किसी बाहरी स्रोत जैसे इंटरनेट या अन्य नेटवर्क से जुड़ती नहीं है. यहां ताकि ईवीएम से कोई बिजली की तार भी नहीं जुड़ी होती है, क्योकि यह बैटरी पर चलती है. वाराणसी में मिले ईवीएम ट्रेनिंग के लिए थे, जांच में सामने आया सच, चुनाव आयोग ने कहा- धांधली के आरोप अफवाह.

ईवीएम मतों को दर्ज करने का एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन दो इकाइयों से बनी होती हैं – एक कंट्रोल यूनिट और एक बैलेटिंग यूनिट – जो पाँच-मीटर केबल से जुड़ी होती हैं. नियंत्रण इकाई पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास रखी जाती है और बैलेट यूनिट को मतदान कम्पार्टमेंट के अंदर रखा जाता है. मतपत्र जारी करने के बजाय, कंट्रोल यूनिट के प्रभारी मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट पर मतपत्र बटन दबाकर एक मतपत्र जारी करते है. इससे मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार और प्रतीक के सामने बैलेट यूनिट पर नीले बटन को दबाकर अपना वोट डालता है. मतदाता चाहकर भी एक बार से ज्यादा बार नीली बटन नहीं दबा सकता है, क्योकि एक बार बटन दबने के बाद फिर से कंट्रोल यूनिट से मतपत्र जारी होने के बाद ही ईवीएम के बटन काम करते है. इसलिए बार-बार बटन दबाने से एक से अधिक बार मतदान संभव नहीं है.

ऐसा ही एक आरोप सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लगाया है. उन्होंने दावा किया है कि बनारस में ईवीएम से लदी तीन गाड़ियां पकड़ी गई थीं. दो गाड़ियां निकल गईं लेकिन एक को सपा के कार्यकर्ताओं ने पकड़ लिया. इसी आधार पर अखिलेश कह रहे हैं कि चुनाव में धांधली की कोशिश की जा रही है.

आप सभी को बता दें की भारत निर्वाचन आयोग  द्वारा उपयोग की जा रही ईवीएम अधिकतम 2,000 मत दर्ज कर सकती है। यदि किसी मतदान केंद्र पर वोटिंग के समय ईवीएम खराब हो जाती है, तो उसे नई ईवीएम के साथ बदल दिया जाता है. जब ईवीएम खराब हुई हो तो उस समय तक दर्ज किए गए मत कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में सुरक्षित पड़े रहते हैं और खराब ईवीएम को नए ईवीएम से बदलने से मतदान प्रक्रिया सामान्य हो जाती है. यहां तक की मतगणना के दिन भी दोनों नियंत्रण इकाइयों में दर्ज मतों को उस मतदान केंद्र का पूर्ण योग परिणाम प्राप्त करने हेतु गिना जाता है। मतदान पूरा होने के बाद अर्थात जब आखिरी मतदाता मतदान कर ले, कंट्रोल यूनिट का प्रभारी अधिकारी/ पीठासीन अधिकारी ‘क्लोज’ बटन दबाता है. इसके बाद ईवीएम कोई भी वोट को स्वीकार नहीं करती है. मतदान समाप्त होने के बाद, कंट्रोल यूनिट को स्विच ऑफ कर दिया जाता है और उसके बाद बैलेटिंग यूनिट को कंट्रोल यूनिट से अलग कर दिया जाता है. और सीलबंद कर दिया जाता है. इसके अलावा, पीठासीन अधिकारी को प्रत्येक मतदान एजेंट को दर्ज किए गए मतों के लेखे की एक प्रति सौंपनी होती है. मतगणना के समय, एक विशेष कंट्रोल यूनिट में दर्ज कुल मतों का इस लेखे से मिलान किया जाता है और यदि कोई असंगति है, तो काउंटिंग एजेंटों द्वारा उसे इंगित किया जा सकता है.

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