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आखिर कैसे हारकर भी जीत गए पुष्कर सिंह धामी, बने उत्तरखंड के CM

उत्तराखंड के सीएम पर लम्बी जद्दोजहद के बाद एक फिर बीजेपी(BJP) हाई कमान ने युवा चेहरे को मौका दिया है. बीजेपी विधायक दल की बैठक में पुष्कर सिंह धामी को विधायक दल का नेता चुना गया है. विधायक दल की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मीनाक्षी लेखी बतौर पर्यवेक्षक मौजूद रहे. मंगलवार को राज्य के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है.

जानिए कौन हैं पुष्कर सिंह धामी और क्यों उन्हें ये जिम्मेदारी मिली है. पुष्कर सिंह धामी पिथौरागढ़ जिले के एक छोटे से गांव में पैदा हुए और उनके पिता एक पूर्व सैनिक हैं. इससे पहले धामी छात्र नेता के तौर पर काफी सालों तक एबीवीपी में काम कर चुके हैं. इस दौरान वो छात्र संगठन के कई अहम पदों पर रहे. पुष्कर सिंह धामी इसके बाद भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।

पुष्कर सिंह धामी बीते साल जुलाई में उत्तराखंड के सीएम बने थे। 2017 में बीजेपी के चुनाव जीतने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया था. उनके बाद तीरथ सिंह रावत को सीएम बनाया और फिर चुनाव से कुछ महीने पहले पुष्कर धामी को सत्ता की बागडोर सौंपी गई थी. अब एक बार फिर धामी सीएम बनने जा रहे हैं।

यही नहीं, नए सीएम के नाम की कवायद में उत्तराखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज और पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से भी हाईकमान का विचार विमर्श हुआ. इसके बाद सोमवार को देहरादून में धामी का विधायक दल का नेता चुना गया है।

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भाजपा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत को बदलते हुए पिछले कार्यकाल में धामी पर दांव खेला था. यही नहीं, 57 विधायकों की संख्या होने के बावजूद भाजपा ने तीन-तीन मुख्यमंत्री बदल डाले थे. ऐसे में पार्टी की ज्यादा किरकिरी न हो इसलिए धामी पर दांव खेला गया. इसके साथ ही धामी से पहले बने दो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत का संबंध गढ़वाल से रहा है.

साथ ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का संबंध गढ़वाल मंडल के हरिद्वार जिले से है. ऐसे में भाजपा आलाकमान ने राजपूत बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले कुमाऊं के नेता पुष्कर सिंह धामी पर दांव खेलना सही समझा था, ताकि कुमाऊं और गढ़वाल को बैलेंस किया जा सके. जबकि 2022 में भाजपा का ये दांव सही साबित हुआ है. आखिर हर बार सत्‍ता बदलने का दौर इस बार थम गया है.

इसके अलावा वह न केवल युवा और ऊर्जावान हैं बल्कि भाजपा ने पहाड़ी राज्य में उनके नाम पर चुनाव लड़ा था और शानदार जीत दर्ज की. जबकि पिछले कार्यकाल में बेहद कम समय मिलने के बाद भी उन्‍होंने भाजपा के प्रति जनता के विरोध को थाम लिया था. यही नहीं, युवाओं और महिलाओं में धामी का बहुत क्रेज है।

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