madhepura mahila pitai
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ये कैसा नया भारत? महिला की डंडो से पिटाई की जा रही, कपड़े नोचे जा रहे!

यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता।
यत्रेतास्तु न पूज्यंते सर्वास्तत्त्राफला: क्रिया:।
इसका अर्थ है जहां स्त्रियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं और जहां स्त्रियों की पूजा नहीं होती है, उनका सम्मान नहीं होता है वहां किए गए समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं। यह मनुस्मृति का श्लोक है। आज की तारीख में भी महिलाओं के सम्मान में कितने कसीदे गढ़े जाते हैं। महिला दिवस पर सरकारे घोषणाये करती हैं। महिलाओं की सुरक्षा संबंधी दावे किए जाते हैं। कहा जाता है कि हमारे राज में महिलाएं सबसे सुरक्षित हैं। आधी रात को भी घूम सकती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है। आए दिन महिलाओं के साथ बलात्कार की, मारपीट की,उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

बिहार के मधेपुरा में से आए वीडियो को देखकर देश में महिलाओं की बदतर हालत की असलियत पता चलती है। यहां पर एक महिला पर कुछ ग्रामीणों ने बदचलन होने का आरोप लगाकर उसके साथ बुरी तरह मारपीट की। पीड़ित महिला ने बताया कि वह रात में शौच के लिए खेत में गई थी। इसी दौरान गांव के कुछ लोगों ने उसे पकड़ लिया और कहा कि खेत में तुम्हारे साथ और कौन है जब महिला ने कहा कि कोई नहीं है तो वे लोग महिलाओं के साथ मारपीट करने लगे।

हमला करने वाले लोग गांव के ही शंकर दास, पिंटू दास, प्रदीप दास और अभय दास थे और इन लोगों से महिला के परिवार का पहले से विवाद होना बताया जा रहा है। यह लोग रात को ही महिला की पिटाई करने लगे, लेकिन ग्रामीणों के हस्तक्षेप से वे रोक लिए गए। आगे जो हुआ उसके बाद हमारा समाज सभ्य कहलाने योग्य नहीं रहा।

अगले दिन सुबह गांव में पंचायत बैठी। पंचायत मे महिला को बुलाया गया। इसके बाद पंचायत के आदेश पर महिला की जमकर पिटाई हुई महिला को डंडों से पीटा जा रहा है,वह अपने बचाव में यहां से वहाँ दौड़ रही है। इन लोगों की हिमाकत देखिये एक ओर जहां महिला पर बदचलन होने का आरोप लगाकर उसे सजा सुना रहे हैं और दूसरी ओर खुलेआम उसकी साडी नोची जा रही है। उसकी इज्जत से खेला जा रहा है। महिला की इतनी पिटाई की गई कि वह बेहोश हो गई। बाद में उसे अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसका इलाज चल रहा है।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। हो सकता है आरोपी पकड़ लिया जाए, लेकिन उस से क्या होगा? महिला ने जो मानसिक प्रताड़ना झेली है, उसकी क्षतिपूर्ति क्या हो पाएगी? हमारी कानून व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि ऐसे घ्रणित काम करने की लोग हिम्मत ही नहीं जुटा पाए। ऐसी घटनाये होने ही ना पाए ऐसी मिसाल कायम की जानी चाहिए।

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