yuri gagrin
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जब यूरी गागरिन ने खोले थे अंतरिक्ष की दुनिया के रहस्य।

बचपन में आपने स्कूल में पढ़ाई करते हुए ही एक नाम सुना होगा। एक ऐसा नाम जिसने मानव जाति के लिए अंतरिक्ष युग की शुरुआत की। एक ऐसा नाम जिसकी याद में हर साल 12 अप्रैल यानी आज के दिन को विश्व स्तर पर मानव अंतरिक्ष उड़ान का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है।ठीक 61 साल पहले, 27 वर्षीय सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गागारिन पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले पहले इंसान बने थे।

12 अप्रैल, 1961 को, गागारिन ने वोस्तोक 1 अंतरिक्ष यान जो कि पहला मानव कक्षीय अंतरिक्ष यान था उसका अंतरिक्ष में अकेले संचालन किया। आपको जानकार थोडी हैरानी होगी कि गागरिन से पहले 3 नवंबर, 1957 को फीमेल डॉग ‘लाइका’ को स्पेस में भेजा गया था। हालांकि वह अंतरिक्ष में सिर्फ़ छह घंटे ही जीवित रह सकी। चैंबर का तापमान अधिक होने की वजह से उसकी मौत हो गई थी।

50 से 70 के दशक तक अमेरिका और सोवियत संघ के बीच एक शीत युद्ध चल रहा था।अंतरिक्ष में कौन क्या उपलब्धि हासिल करता है, उसे लेकर एक शांत प्रतियोगिता चल रही थी।दोनों का एक ही लक्ष्य था कि कौन सबसे पहले? और यूरी गागरिन को अंतरिक्ष में भेजकर सोवियत संघ ने ये रेस जीत ली। सात टेस्ट फ्लाइट के बाद (Vostok 3KA-3 Spacecraft) को यूरी गागरिन को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए सबसे सटीक यान माना गया क्योकि इससे पहले इसमें यंत्र और जानवर अंतरिक्ष भेजे जा चुके थे।

27 वर्षीय सोवियत एयरफोर्स पायलट यूरी गागरिन को अंतरिक्ष की यात्रा पर भेजा गया। इस मिशन के लिए जिस रॉकेट का उपयोग किया गया था वो पहले परमाणु मिसाइल हुआ करती थी।R-7 नामक यह मिसाइल दुनिया की पहली इंटर-कॉन्टीनेंटल यानी अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल थी। लॉन्च के 11 मिनट 16 सेकेंड के बाद वे धरती की कक्षा में पहुंच गए।उन्होंने धरती का एक चक्कर लगाया जिसमे उन्हें करीब 108 मिनट लगे। इसके बाद वो लैंडिंग के लिए धरती की ओर आने लगे। वैसे तो वे एक कैप्सूल मे बैठे थे लेकिन लैंडिंग के लिए यूरी ने 23 हजार फीट की ऊंचाई पर खुद को कैप्सूल से इजेक्ट कर लिया था। इसके बाद कैप्सूल और यूरी दोनों अलग-अलग पैराशूट के सहारे जमीन पर उतरे और इतिहास रच दिया। यह ऐतिहासिक उड़ान केवल एक घंटे 48 मिनट तक चली।

रूस में, इस दिन को हर साल ‘कॉस्मोनॉटिक्स डे’ के रूप में मनाया जाता है। यूरी गागरिन में दुनिया के लिए अंतरिक्ष से रास्ते खोल दिये लेकिन कुछ सालों बाद ही 27 मार्च 1968 को मिग फाइटर विमान उड़ाते समय क्रैश होने से उनकी मृत्यु हो गई।

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