Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

अमेरिका, यूरोप की कंपनियां कारोबार शिफ्ट करने पर विचार कर रहे ?

पूरी दुनिया कोविड-19 के साथ जीना सीख चुकी है लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग चाहते हैं कि उनका देश उसके बगैर काम चलाए। चीन ने वुहान में कोरोना के खिलाफ पहली लड़ाई जल्दी जीत ली थी। मार्च से ठप पड़े देश के प्रमुख बिजनेस सेंटर शंघाई में महामारी की ओर संकेत करते हुए शी ने पिछले हफ्ते कहा कि हम शंघाई को बचाने के संघर्ष में जीतेंगे। दूसरी ओर चीन पर जीरो -कोविड रणनीति में बदलाव के लिए दबाव बढ़ा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है, चीन की मौजूदा महामारी नीति कारगर नहीं होगी। एक अर्थशास्त्री ने स्थिति की व्याख्या करते हुए उसे जीरो गतिविधि और जीरो जीडीपी करार दिया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां देश में नया निवेश करने पर हिचक रही हैं। शोधकर्ता चेतावनी दे चुके हैं कि यदि वायरस बेकाबू रहा तो मौतों की सुनामी आ सकती है।

एक अनुमान के अनुसार चीन में पिछले माह 45 शहरों की लगभग 40 करोड़ आबादी किसी तरह के लॉकडाउन और प्रतिबंधों के साये में रही। इन शहरों का सालाना जीडीपी 55 लाख करोड़ रुपए है। अर्थशास्त्री चिंतित हैं कि लॉकडाउन का विकास दर पर खराब असर पड़ेगा। एक अर्थशास्त्री का कहना है कि अगर लॉकडाउन एक माह जारी रहा तो मंदी आ सकती है। निवेशक और कारोबारी सोचते हैं कि जीरो-कोविड नीति से अर्थव्यवस्था की हालत पतली हो जाएगी। एक प्रमुख चीनी निवेशक फ्रेड ह्यू ने कहा, सरकार के लिए रणनीति बदलने का यह सही समय है। जीरो-कोविड नीति से अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाएगी।

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

साझा करें

ताजा खबरें

सब्सक्राइब कर, हमे बेहतर पत्रकारिता करने में सहयोग करें