3 june plan
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क्यों गांधीजी भी भारत-पाकिस्तान का बंटवारा रोक नहीं सकें?

आज तारीख है 3 जून 2022, आज की तारीख भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखती है. 3 जून 1947 ये वही तारीख है जब माउंटबेटन योजना प्रकाश में आई. ये वही माउंटबेटन प्लान था जिसमे भारत और पाकिस्तान के बंटवारे की बात लिखी गई थी. लिखित रूप से तो बंटवारे की बात 3 जून को सामने आई लेकिन भारत को 2 टुकड़ो में बाँटने की चिंगारी काफी पहले ही भड़क गई थी. हुआं यूँ कि द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात ब्रितानी सरकार ने आजाद हिन्द फौज के अधिकारियों पर मुकद्दमा चलाने की घोषणा की, जिसका भारत में बहुत विरोध हुआ. जनवरी 1946 में सशस्त्र सेनाओं में छोटे-बड़े अनेकों विद्रोह हुए. अंततः 20 फरवरी 1947 को ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमन्त्री सर रिचर्ड एडली ने घोषणा कर दी कि ब्रितानी सरकार भारत को जून 1947 के पहले पूर्ण स्वराज्य का अधिकार दे देगी.

एटली की घोषणा के पश्चात् यह निश्चित हो गया कि अब भारत को स्वतंत्रता मिलने ही वाली है. स्वतंत्रता मिलने की संभावना जब साकार होने जा रही थी तो लोगों पर सांप्रदायिकता का जुनून सवार हो गया. बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए जिसमें लीग, हिन्दू महासभा और अकाली दल तीनों शामिल थे. लाहौर में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन हुआ. लाहौर, अमृतसर, तक्षशिला, रावलपिंडी, बिहार, बंगाल आदि जगहों में भीषण नर-संहार हुआ. जहाँ तक की सेना और पुलिस भी अप्रत्यक्ष रूप से दंगाइयों की मदद करने लगे. महात्मा गांधी एक जगह से दूसरी जगह सांप्रदायिक एकता कायम करने के लिए घूमते रहे, लेकिन कोई उनकी बात सुनने वाला नहीं था.

इन्ही हालातों में 24 मार्च, 1947 को नये वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन आये. वे जल्द ही जान गए कि भारत का बंटवारा होकर ही रहेगा. मुस्लिम लीग और कांग्रेस के मतभेदों को मिटाना बहुत मुश्किल काम था. गांधीजी किसी भी हालत मे देश का विभाजन नहीं चाहते थे.वे माउंटबेटन से मिले और उन्हें विभाजन रोकने की बात कही. गांधीजी जिन्ना को सरकार बनाने देने के लिए भी राजी थे. लेकिन बाद में नेहरू और पटेल के दबाव में गांधीजी को भी विभाजन स्वीकार करना ही पड़ा.

विभाजन की लकीर कुछ लोगो के दिलों-दिमाग पर तो काफी पहले ही खिंच चुकी थी, आखिरकार वह योजना पन्नो पर 3 जून, 1947 को माउंटबेटन योजना के रूप में भी प्रकाशित हो गई. इसमें लिखा था –

  • भारत का विभाजन भारतीय संघ और पाकिस्तान में कर दिया जाये.
  • इन राज्यों की सीमा निश्चित करने के पूर्व पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत प्रदेश और असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह कराया जाये और सिन्ध विधान सभा में वोट द्वारा यह निश्चित किया जाये कि वे किसके साथ रहना चाहते हैं.
  • बंगाल और पंजाब में हिन्दू तथा मुसलमान बहुसंख्यक जिलों के प्रांतीय विधानसभा के सदस्यों की अलग-अलग बैठक बुलाई जाए. उसमें से अगर कोई भी पक्ष प्रातं का विभाजन चाहेगा तो विभाजन कर दिया जाएगा.
  • हिन्दुस्तान की संविधान सभा दो हिस्सो में बंट जायेगी, जो अपने-अपने लिए संविधान तैयार करेगी. दोनों राज्यों को डोमिनयन स्टेटस प्रदान किया जायेगा.
  • देशी रियासतों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे जिसके साथ चाहें, मिल जायें या अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनायें रखें.

बस फिर क्या था लीग तथा कांग्रेस द्वारा इस योजना के स्वीकार किये जाने के बाद लॉर्ड माउन्टबेटन ने इस पर काम शुरू कर दिया. आखिर में भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र देशों के रूप में अस्तित्व में आये.

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